बरखा त्रेहन Metoo अभियान के दौरान की गई शिकायतों पर विशेष तौर पर
आपत्ति जताती हैं. वह कहती हैं कि ये डिजिटल डिफेमेशन था जिसमें न कोई
औपचारिक शिकायत हुई और न ही कोई प्रमाण दिए गए. बस किसी को टैग करके यौन
उत्पीड़न का आरोप लगा दिया और वो लोग बदनाम हो गए. सिर्फ़ महिलाओं की बात
सुनी गई. तब शिकायत क्यों नहीं की गई जब उनके साथ गलत हुआ था.
इस संबंध में कमला भसीन कहती हैं कि जहां तक बात Metoo की है तो वो समय की मांग थी. कुछ महिलाओं ने अपने अनुभव लिखे तो उसी तरह की पीड़ा से गुज़री लाखों महिलाएं भी सामने आईं. ये मसला वैश्विक स्तर पर उठा था और सभी महिलाओं ने उस तकलीफ़ की भड़ास निकाली थी. उन्होंने सजा की मांग नहीं की क्योंकि उन्हें पता है कि सज़ा दिलवा पाना आसान नहीं. समय, समाज और पैसा, तीनों का सामना करना पड़ता है.
लेकिन, इस अभियान ये ज़रूर सामने आया कि कितने बड़े स्तर पर महिलाएं यौन उत्पीड़न का शिकार हो रही हैं और हम वो माहौल नहीं दे पाए हैं कि वो इस नाइंसाफी को ज़ाहिर भी कर सकें.
राष्ट्रीय से लेकर स्थानीय चैनलों तक सबने बंगाल में बीजेपी की बंपर कामयाबी का दावा किया है. तमाम एग्ज़िट पोल्स में बीजेपी को प्रदेश में दस से ज़्यादा सीटें मिलने का दावा किया गया है.
लेकिन मुख्यमंत्री और टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी ने कहा है, "मैं एग्ज़िट पोल की अफ़वाह पर भरोसा नहीं करती."
वर्ष 2009 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को महज़ छह फीसदी वोट मिले थे जो वर्ष 2014 के चुनावों में तीन गुना बढ़ कर लगभग 17 फीसदी तक पहुंच गए.
अपनी रणनीति पर बात करते हुए राहुल सिन्हा कहते हैं कि प्रदेश में भाजपा ने पहले बूथ पर ध्यान लगाया और फिर संगठन का विस्तार किया.
वह कहते हैं, "इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस का सर्वनाश होने जा रहा है और इसका कारण ममता बनर्जी ख़ुद हैं. उन्होंने ही हमें ढेर सारे मुद्दे दिए."
वह कहते हैं कि संगठन से ही सब कुछ नहीं होता, जनता को लुभाने के लिए मुद्दों की ज़रूरत होती है. वह आरोप लगाते हैं, "ममता बनर्जी ने हिंदू-मुसलमान का कार्ड खेलकर विभाजन पैदा किया और हिंदुओं के मन में भय पैदा कर दिया."
हालांकि तृणमूल कांग्रेस और दूसरे दल ये आरोप लगाते हैं कि भाजपा प्रदेश में हिंदू अतिवाद को बढ़ावा दे रही है.
इस आरोप को ख़ारिज़ करते हुए राहुल सिन्हा कहते हैं, "हम लोगों ने कुछ नहीं किया. हमने कोई कार्ड नहीं खेला. उन्होंने जो खेला, हमने उसे जनता के बीच उजागर किया."
तलवार लेकर जुलूस निकाले जाने के सवाल पर वह कहते हैं कि ऐसे जुलूस पहले भी होते थे. वह आरोप लगाते हैं, "हमने कोई बंदूकें या बम लेकर जुलूस निकाला क्या? बम लेकर तो ममता जी के लोग निकालते हैं."
इस संबंध में कमला भसीन कहती हैं कि जहां तक बात Metoo की है तो वो समय की मांग थी. कुछ महिलाओं ने अपने अनुभव लिखे तो उसी तरह की पीड़ा से गुज़री लाखों महिलाएं भी सामने आईं. ये मसला वैश्विक स्तर पर उठा था और सभी महिलाओं ने उस तकलीफ़ की भड़ास निकाली थी. उन्होंने सजा की मांग नहीं की क्योंकि उन्हें पता है कि सज़ा दिलवा पाना आसान नहीं. समय, समाज और पैसा, तीनों का सामना करना पड़ता है.
लेकिन, इस अभियान ये ज़रूर सामने आया कि कितने बड़े स्तर पर महिलाएं यौन उत्पीड़न का शिकार हो रही हैं और हम वो माहौल नहीं दे पाए हैं कि वो इस नाइंसाफी को ज़ाहिर भी कर सकें.
भारतीय जनता पार्टी ने दावा किया है कि वह पश्चिम बंगाल में दहाई का आंकड़ा पार करके सबसे बड़े दल के रूप में उभरेगी.
भाजपा
के राष्ट्रीय सचिव और पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रमुख नेताओं में से एक
राहुल सिन्हा ने बीबीसी से बात करते हुए यह भी कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार बनने के छह महीनों के भीतर ही प्रदेश में विधानसभा चुनाव होंगे और
बीजेपी सत्ता में आ जाएगी.राष्ट्रीय से लेकर स्थानीय चैनलों तक सबने बंगाल में बीजेपी की बंपर कामयाबी का दावा किया है. तमाम एग्ज़िट पोल्स में बीजेपी को प्रदेश में दस से ज़्यादा सीटें मिलने का दावा किया गया है.
लेकिन मुख्यमंत्री और टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी ने कहा है, "मैं एग्ज़िट पोल की अफ़वाह पर भरोसा नहीं करती."
वर्ष 2009 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को महज़ छह फीसदी वोट मिले थे जो वर्ष 2014 के चुनावों में तीन गुना बढ़ कर लगभग 17 फीसदी तक पहुंच गए.
अपनी रणनीति पर बात करते हुए राहुल सिन्हा कहते हैं कि प्रदेश में भाजपा ने पहले बूथ पर ध्यान लगाया और फिर संगठन का विस्तार किया.
वह कहते हैं, "इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस का सर्वनाश होने जा रहा है और इसका कारण ममता बनर्जी ख़ुद हैं. उन्होंने ही हमें ढेर सारे मुद्दे दिए."
वह कहते हैं कि संगठन से ही सब कुछ नहीं होता, जनता को लुभाने के लिए मुद्दों की ज़रूरत होती है. वह आरोप लगाते हैं, "ममता बनर्जी ने हिंदू-मुसलमान का कार्ड खेलकर विभाजन पैदा किया और हिंदुओं के मन में भय पैदा कर दिया."
हालांकि तृणमूल कांग्रेस और दूसरे दल ये आरोप लगाते हैं कि भाजपा प्रदेश में हिंदू अतिवाद को बढ़ावा दे रही है.
इस आरोप को ख़ारिज़ करते हुए राहुल सिन्हा कहते हैं, "हम लोगों ने कुछ नहीं किया. हमने कोई कार्ड नहीं खेला. उन्होंने जो खेला, हमने उसे जनता के बीच उजागर किया."
तलवार लेकर जुलूस निकाले जाने के सवाल पर वह कहते हैं कि ऐसे जुलूस पहले भी होते थे. वह आरोप लगाते हैं, "हमने कोई बंदूकें या बम लेकर जुलूस निकाला क्या? बम लेकर तो ममता जी के लोग निकालते हैं."